जन अधिकार छात्र परिषद ने किया शक्ति प्रदर्शन, रोड मार्च कर मांगा वोट

 

 

 

पटना15 फरवरी : पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के प्रेसिडेंसियल डिबेट में छात्रों को संबोधित करते हुए जन अधिकार छात्र परिषद की ओर से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार गौतम कुमार ने कहा कि पटना विवि से निकले छात्र नेताओं की केंद्र सरकार में और बिहार सरकार में लंबे समय से भागीदारी रही है। बिहार सरकार का तो पिछले 28 वर्षों से यहीं के छात्र नेता नेतृत्व कर रहे हैं। फिर भी विश्विद्यालय की स्थिति  सुधरने के बजाए दिनों दिन बिगड़ती जा रही है।

उन्‍होंने कहा कि आज हम छात्रों के बीच सवाल लेकर नहींबल्कि जवाब के साथ उपस्थित हैं। यदि आपलोगों ने मुझे मौका दिया तो इस विश्विद्यालय की गरिमा के नवनिर्माण में कोई कसर नही छोडूंगा। उन्होंने कहा कि हम अपने कार्यकाल में शिक्षा के प्रारूप में आमूल परिवर्तन करते हुए रोजगारोउन्मुखी निर्माण करते हुए इसको जीवनोपयोगी बनाएंगे। शिक्षकों एवं कर्मचारी की पर्याप्त बहाली कराकर स्वच्छशैक्षणिक वातावरण के निर्माण हेतु छात्रशिक्षक अभिभावक समिति बनवाएंगे। छात्र छात्राओं के लिए पर्याप्त छात्रावास की व्यवस्थास्मार्ट क्लास रूमआधुनिक प्रयोगशालाबेहतरीन लाइब्रेरीस्वच्छ पेयजलसाफ शौचालयस्पेशियस कॉमन रूमस्पोर्ट्स सिस्टमजिम किटमल्टी टेस्ट कैंटीन की व्यवस्थाडिस्पेंसरीप्लेसमेंट सेलसेंट्रल लाइब्रेरी को 24 घण्टे खुलवाएंगे।

इससे पहले PUSU चुनाव को लेकर जन अधिकार छात्र परिषद ने गुरूवार को शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्र परिषद ने पटना लॉ कॉलेज से सभी कॉलेज होते हुए म‍गध महिला कॉलेज तक रोड मार्च किया और सेंट्रल पैनल के चारों उम्‍मीदवार अध्‍यक्ष गौतम आनंदउपाध्‍यक्ष प्रत्‍युष शुभमसंयुक्‍त सचिव मो असजद उर्फ आजाद चांद और कोषाध्‍यक्ष आशीष कुमार के लिए वोट मांगा। इस मार्च में पटना विवि के लगभग 3000 छात्रों ने भाग लिया। इस दौरान अपने संबोधन में गौतम ने कहा कि हमारा पटना विश्वविद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है। देश का सातवें महाविद्यालय पटना कॉलेज के ऐतिहासिक मैदान से छात्र समुदाय को संबोधित करते हुए हर्ष हो रहा है। लम्बे समय से छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार छात्र संघ चुनाव मिल गया है। विश्विद्यालय की गरिमा बचाने के लिए हमेशा संघर्ष करता रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा।

संयुक्‍त सचिव पद के उम्‍मीदवार मो असजद उर्फ आजाद चांद ने कहा कि विश्वविद्यालय लोकतंत्र का प्रथम पाठशाला हैंजहाँ से कुशल वैज्ञानिककुशल प्रशाशककुशल इंजीनियरकुशल डॉक्टरकुशल नेतृत्वकर्ता पैदा किया है। वर्तमान समय में कुशल नेतृत्व कर्ता का अभाव हो गया हैजिसकी वजह से हम छात्र समुदाय अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रहते हैं। वर्तमान समय संक्रमण काल के दौर से गुजर रहा है। वैसी परिस्थिति में हम छात्रों का दायित्व बनता है कि कुशल नेतृत्व देकर इस देश की आंतरिक लोकतंत्र को बचा सकें। महान समाजवादीक चिंतक लोहिया कहा करते थे - जब सड़के सूनी हो जाएंगी तब संसद अवारा हो जाएगा।

जन अधिकार छात्र परिषद के उपाध्‍यक्ष विकास बॉक्‍सर के नेतृत्‍व में सघन छात्र जनसपंर्क अभियान भी चलाया गयाजहां उन्‍होंने जन अधिकार छात्र परिषद के उम्‍मीदवार को वोट करने की अपील करते हुए कहा कि यह छात्रसंघ चुनाव वर्तमान समय मे केंद्र और राज्य सरकार के विरूद्ध एक सशक्त नेतृत्व देगा। उन्‍होंने कहा कि आज दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि विश्व का इकलौता भारत देश अपने केंद्रीय शिक्षा बजट में कटौती करता है। मेरी मांग है कि केंद्रीय बजट का 10वां हिस्सा और राज्य बजट का 30वां हिस्सा शिक्षा पर खर्च होतब जाकर हम विश्वगुरु बनने की कल्पना कर सकते हैं।  साथ ही आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। विश्विद्यालय के सभी कॉलेजो में ई लाइब्रेरी की व्यवस्था हो बेहतर पठन पाठन की व्यवस्था होशिक्षा को रोजगार बनाने के नाम पर पूरे शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने की साजिश को नाकाम करेंगे। छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार छात्रसंघ चुनाव  प्रत्येक वर्ष हो ताकि विश्विद्यालय में प्रत्येक वर्ष हो ताकि विश्विद्यालय में प्रतिरोध की संस्कृति बनी रहे।