न्‍यायिक सेवा आयोग गठित करने की मांग की सांसद पप्‍पू यादव ने

 

                 न्‍यायिक सेवा आयोग गठित करने की मांग की सांसद पप्‍पू यादव ने

 

न्‍यायपालिका में एससीएसटीओबीसी और अल्‍पसंख्‍यक समुदायों का प्रतिनिधित्‍व बढ़ाने के लिए हो विशेष व्‍यवस्‍था

न्‍यायिक सेवा में भी हो आरक्षण

पटना। जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव(Pappu Yadav) ने यूपीएससी और बीपीएससी की तर्ज पर न्‍यायायिक सेवा आयोग गठित करने की मांग की है। उन्‍होंने जारी बयान में कहा कि अन्‍य सरकारी सेवाओं की तरह न्‍यायिक सेवा में भी आरक्षण निर्धारित किया जाना चाहिए।

 

 

श्री यादव ने कहा कि न्‍यायालयों में एससीएसटीओबीसी और अल्‍पसंख्‍यक समुदायों के जजों की संख्‍या नगण्‍य है। जजों के चयन वाले कॉ‍लेजियम में इन वर्गों का प्रतिनिधित्‍व कम है। वैसे में इन वर्गों के जज की नियुक्ति और चयन कैसे होगा। उन्‍होंने कहा कि न्‍यायपालिका में एससीएसटीओबीसी और अल्‍पसंख्‍यक समुदायों का प्रतिनिधित्‍व बढ़ाने के लिए विशेष व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। आरक्षण के बिना इन वर्गों का प्रतिनिधित्‍व बढ़ाना संभव नहीं है। बिना आरक्षण के सबके लिए न्‍याय की कल्‍पना नहीं की जा सकती है।

सांसद ने कहा कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय में अब तक अनुसूचित जाति के दो, अनुसूचित जनजाति के एक और मुस्लिम समुदाय के चार न्‍यायाधीश ही मुख्‍य न्‍यायाधीश हुए हैं। देश के 24 उच्‍च न्‍यायालयों में वर्तमान में करीब 600 न्‍यायाधीश हैं। इसमें मुसलमानों की संख्‍या सिर्फ 24 है। उच्‍च न्‍यायालयों में जजों पद पर 132 परिवारों के न्‍यायाधीशों का ही कब्‍जा है।

उन्‍होंने कहा कि समा‍ज के अंतिम व्‍यक्ति तक न्‍याय पहुंचे, इसके लिए जरूरी है कि वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व भी न्‍याय‍प‍ालिका में हो। इसके लिए न्‍यायिक सेवा में इन वर्गों के लिए आरक्षण सुनिश्‍चित किया जाना चाहिए। वंचित वर्गों को आरक्षण के बिना न्‍याय नहीं मिल सकता है। श्री यादव ने कहा कि गरीब व बंचित वर्ग को भी न्‍याय मिले, इसकी व्‍यवस्‍था भी सरकार को करनी होगी।